-:मेरे शायरियों की दुनियाँ में आपका स्वागत है:-
यह कोई जरूरी नहीं की सभी पंक्तियाँ हमारी ही घटनाओं से सम्बंधित हैं।
किसी और के विगत जीवन को भी देखते हुए लिखा जा सकता है।
शुक्रवार, 13 सितंबर 2013
शायद उन्हें खुद पर ही विश्वास न था
चले गए वो आते आते,
और भला हम क्या समझाते।।
~~~~~~~~~APM
उन्हें कुबूल यह था की वो रहें हम पे मेहरबान,
पर इस ज़माने में भी हम रहे खुद के कदरदान।।
~~~~~~~~~APM
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