-:मेरे शायरियों की दुनियाँ में आपका स्वागत है:-
यह कोई जरूरी नहीं की सभी पंक्तियाँ हमारी ही घटनाओं से सम्बंधित हैं।
किसी और के विगत जीवन को भी देखते हुए लिखा जा सकता है।
रविवार, 22 सितंबर 2013
तेरी ये मदहोश अदाएँ
कोयल जैसी बातें तेरी हिरनी जैसी चाल,
उठा के नजरें यूँ ना देखो हो जाए बवाल,
बुलबुल जैसे स्वर हैं तेरे हाय(hi) है तेरा जाल,
ऐसी कलियाँ जहाँ पे खिलती मचता है धमाल।।
~~~~~~~~~APM
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