-:मेरे शायरियों की दुनियाँ में आपका स्वागत है:-
यह कोई जरूरी नहीं की सभी पंक्तियाँ हमारी ही घटनाओं से सम्बंधित हैं।
किसी और के विगत जीवन को भी देखते हुए लिखा जा सकता है।
मंगलवार, 29 अक्टूबर 2013
और कहूँ तो क्या कहूँ
खुदा को वह रिश्ता मंजूर ना था इसलिए शायद,
क्योंकि बनाया होगा उसने कहीं उससे भी नायब।।
~~~~~~~~~APM
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