-:मेरे शायरियों की दुनियाँ में आपका स्वागत है:-
यह कोई जरूरी नहीं की सभी पंक्तियाँ हमारी ही घटनाओं से सम्बंधित हैं।
किसी और के विगत जीवन को भी देखते हुए लिखा जा सकता है।
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रविवार, 8 दिसंबर 2013
APM
गाऊँ क्या अब मैं बीते दिनों की वो बातें,
मिले मिट्टी में सारे सपने सारी आसें।
उन्हें तो आती होगी नींद अच्छी शायद,
यहाँ तो न दिन में है चैन और हँसती हैं रातें।।
~~~~~~~~~APM
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