शुक्रवार, 13 दिसंबर 2013

ओ तो थे ही नहीं अपने

आँसू भी इक प्रेम रस ही है,वरना घृणा में कहाँ होता है रोना।
कभी पराये के लिए इक बूँद निकाल कर तो देखो,पाओगे क्या रोना और किसको खोना।।
~~~~~~~~~APM

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