रविवार, 11 अगस्त 2013


आज अपने भी जब अपने ना रहे
तब सपने भी अब अदने ना रहे
हमने की थी कल्पना स्वर्ग की एक दिन,
पर आज तो हम-कदमे भी ना रहे।।
~~~~~~~~~APM
अब एकाकी हँसी जहाँ बनायेंगे हम,
उनको एक राह अपनी बताएँगे हम,
आने वाला भले हो हर सख्स बेवफा,
झेल लेंगे उसको भी अब बिना किसी गम।।
~~~~~~~~~APM

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें