-:मेरे शायरियों की दुनियाँ में आपका स्वागत है:-
यह कोई जरूरी नहीं की सभी पंक्तियाँ हमारी ही घटनाओं से सम्बंधित हैं।
किसी और के विगत जीवन को भी देखते हुए लिखा जा सकता है।
शुक्रवार, 23 अगस्त 2013
कल बीत भी चुका है और आने वाला भी है
कहते कहते देखो ओ क्या कह गए,
हमें दर्दे दिल की दवा कह गए,
रुसवाई तो आ ही न पाई यहाँ तक
जुदा हुए यूँ की अब कल में रह गए।।
~~~~~~~~~APM
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