-:मेरे शायरियों की दुनियाँ में आपका स्वागत है:-
यह कोई जरूरी नहीं की सभी पंक्तियाँ हमारी ही घटनाओं से सम्बंधित हैं।
किसी और के विगत जीवन को भी देखते हुए लिखा जा सकता है।
सोमवार, 16 दिसंबर 2013
साख से पत्ते भी गिरने लगे अब
साख से पत्ते भी गिरने लगे अब,
सीफ से मोती भी झड़ने लगे अब,
ज्यादा क्या बताएं रूठ गये ओ भी जाने कब,
की टूट के सारे सपने भी बिखरने लगे अब।।
~~~~~~~~~APM
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