वो है यहीं कहीँ है,
मेरे आसपास बैठी,
मेरी बातें सुनती,
महक रही हैं साँसे उसकी,
वो यहीं है,
वो चुप है ना जाने क्यूँ,
समय भी रुकी है,
वो कब बोलेगी,
मैं रूठूंगा नहीं उससे,
फिर भी वो नरम है,
वो अदब है,
वो कहानी नहीं
वो रूहानी है,
वो मेरी आज की नहीं
वो पुरानी है,
ऐ समय तू थोड़ा और रुक,
वो बोलेगी,
वो हवाओं तुम जाओ,
वो सरमा रही है,
ऐ चाँदनी तुम भी आओ,
वो घबरा रही है।
~~~~~~~~~APM
-:मेरे शायरियों की दुनियाँ में आपका स्वागत है:- यह कोई जरूरी नहीं की सभी पंक्तियाँ हमारी ही घटनाओं से सम्बंधित हैं। किसी और के विगत जीवन को भी देखते हुए लिखा जा सकता है।
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मंगलवार, 9 दिसंबर 2014
कौन कहता है वो नहीं है।
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