-:मेरे शायरियों की दुनियाँ में आपका स्वागत है:-
यह कोई जरूरी नहीं की सभी पंक्तियाँ हमारी ही घटनाओं से सम्बंधित हैं।
किसी और के विगत जीवन को भी देखते हुए लिखा जा सकता है।
सोमवार, 8 दिसंबर 2014
न जाने कब आएगी
वो तो मिली नहीं, अब तू ही उसके बारे में लिखदे ऐ कलम,
लोगों से सुना था जिंदगी ही चार दिन की है।
~~~~~~~~~APM
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें