-:मेरे शायरियों की दुनियाँ में आपका स्वागत है:-
यह कोई जरूरी नहीं की सभी पंक्तियाँ हमारी ही घटनाओं से सम्बंधित हैं।
किसी और के विगत जीवन को भी देखते हुए लिखा जा सकता है।
शनिवार, 21 दिसंबर 2013
बस तुम ही हो
मानों ना मानों ये दिल बस तुम्हें बुलाता है,
तन्हाई में भी क्या क्या सपने तेरे सजाता है,
गर देखे ना इक दिन तुमको,ये खुद से रूठ जाता है,
बस एक झलक मिल जाये तेरी, ये भौरों सा चहक जाता है।।
~~~~~~~~~APM
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें