-:मेरे शायरियों की दुनियाँ में आपका स्वागत है:-
यह कोई जरूरी नहीं की सभी पंक्तियाँ हमारी ही घटनाओं से सम्बंधित हैं।
किसी और के विगत जीवन को भी देखते हुए लिखा जा सकता है।
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शुक्रवार, 13 दिसंबर 2013
ओ तो थे ही नहीं अपने
आँसू भी इक प्रेम रस ही है,वरना घृणा में कहाँ होता है रोना।
कभी पराये के लिए इक बूँद निकाल कर तो देखो,पाओगे क्या रोना और किसको खोना।।
~~~~~~~~~APM
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