हम क्यूँ रोयें उसके लिए,
जिसे तड़फना मेरा गँवारा नहीं।
हम भी तो इंसान ही ठहरे,
सड़कों पे फिरता अँवारा नहीं।
सुना हूँ फिर मिला है उसे मुसाफिर कोई,
बंगले हैं उसके,वो झोपड़ीवाला नहीं।
हमें तो अब भी याद आता है वही खुदा,
बेवफा के लिए जिसने हमें सँवारा नहीं।
~~~~~~~~~APM
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