-:मेरे शायरियों की दुनियाँ में आपका स्वागत है:-
यह कोई जरूरी नहीं की सभी पंक्तियाँ हमारी ही घटनाओं से सम्बंधित हैं।
किसी और के विगत जीवन को भी देखते हुए लिखा जा सकता है।
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शनिवार, 25 अक्टूबर 2014
ना जाने वो किसे ढूढ़ती है अदब से तनहाइयों में,
हमे ही अपना कह देती तो तलास पूरी हो जाती।
~~~~~~~~~APM
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