-:मेरे शायरियों की दुनियाँ में आपका स्वागत है:-
यह कोई जरूरी नहीं की सभी पंक्तियाँ हमारी ही घटनाओं से सम्बंधित हैं।
किसी और के विगत जीवन को भी देखते हुए लिखा जा सकता है।
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बुधवार, 31 जुलाई 2013
वह कहती थी हम जान भी दे देंगे अपने दीवाने पर,
जान तो दूर अब मुस्कुराहट भी मिलती बड़े पैमाने पर।।
~~~~~~~~~APM
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