-:मेरे शायरियों की दुनियाँ में आपका स्वागत है:-
यह कोई जरूरी नहीं की सभी पंक्तियाँ हमारी ही घटनाओं से सम्बंधित हैं।
किसी और के विगत जीवन को भी देखते हुए लिखा जा सकता है।
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सोमवार, 29 जुलाई 2013
वह पूछा करती थी अक्सर तारों से
कभी मुझसे भी किन्ही नजारों से
मैं कैसी दिखती हूँ कही मोटी तो नहीं,
आँखों में हमने कहा खुबसूरत हो तुम एक हजारों से ।
~~~~~~~~~APM
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