-:मेरे शायरियों की दुनियाँ में आपका स्वागत है:-
यह कोई जरूरी नहीं की सभी पंक्तियाँ हमारी ही घटनाओं से सम्बंधित हैं।
किसी और के विगत जीवन को भी देखते हुए लिखा जा सकता है।
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शनिवार, 7 दिसंबर 2013
APM
क्या गज़ब हो तुम, चीज बड़ी अजब हो तुम।
प्रीतों का प्रेम हो तुम, महफ़िल का सबब हो तुम,
बखान औरों का अब कितना करें ए जालिम,
मेरी सांसे भी हो तुम, एहसासों में मेरा मजहब भी हो तुम।।
~~~~~~~~~APM
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