-:मेरे शायरियों की दुनियाँ में आपका स्वागत है:-
यह कोई जरूरी नहीं की सभी पंक्तियाँ हमारी ही घटनाओं से सम्बंधित हैं।
किसी और के विगत जीवन को भी देखते हुए लिखा जा सकता है।
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बुधवार, 19 फ़रवरी 2014
मुहब्बत है चीज बड़ी नायब
दिललगी हो जाती है जाने कब कैसे
इक पल का पता नहीं चलता,
ऐ खुदा मुहब्बत चीज बड़ी नायब दी है तूने
काश! यें बेवफाई का हवा नहीं चलता।।
~~~~~~~~~APM
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