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मंगलवार, 11 मार्च 2014

हुनर की तेरे ऐसी तैसी, एक बार यहाँ तू आके देख,
चंद समय में सिमट जाएगी, कहते हैं नज़र मुढ़ा के देख।।
~~~~~~~~~APM
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इन आँखों का भी क्या कहना है,
पूरी मूरत का गहना है,
अब "मौर्य" नशा ना इसमें घोल,
ये तो दर दर अब सहना है।
कुड़ियां चलती एक से एक,
मिलें हजारों में ना नेक,
अब "मौर्य" मुंबई कभी न आना,
फट गया है आधा फिर भी पहना है।
~~~~~~~~~APM

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