-:मेरे शायरियों की दुनियाँ में आपका स्वागत है:-
यह कोई जरूरी नहीं की सभी पंक्तियाँ हमारी ही घटनाओं से सम्बंधित हैं।
किसी और के विगत जीवन को भी देखते हुए लिखा जा सकता है।
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शुक्रवार, 7 मार्च 2014
दोहा
छवी तुम्हारी देखि के, चित में उफनाहट होय।
मौर्य नशा की ऐसी रीती,रहि रहि के ऊपर होय।।
~~~~~~~~~APM
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सगुन वगुन को छोड़ दो, हिय में हमें मिलाय।
दूरि जाऊ को न कहो, है ए पी एम बौराय।।
~~~~~~~~~APM
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