-:मेरे शायरियों की दुनियाँ में आपका स्वागत है:-
यह कोई जरूरी नहीं की सभी पंक्तियाँ हमारी ही घटनाओं से सम्बंधित हैं।
किसी और के विगत जीवन को भी देखते हुए लिखा जा सकता है।
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शुक्रवार, 5 दिसंबर 2014
कारवाँ बन गया
किसी के दर्द की दवाई तो किसी के लिए बागवाँ बन गया।
किसी के लिए मसीहा तो किसी के लिए आसमां सातवाँ बन गया।
वर्षों बाद आज मुड़के जो देखा अपनी दुनियाँ में यारों,
जहाँ में वफ़ा करते करते खिलाफ मेरे एक कारवाँ बन गया।
~~~~~~~~~APM
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