-:मेरे शायरियों की दुनियाँ में आपका स्वागत है:-
यह कोई जरूरी नहीं की सभी पंक्तियाँ हमारी ही घटनाओं से सम्बंधित हैं।
किसी और के विगत जीवन को भी देखते हुए लिखा जा सकता है।
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मंगलवार, 27 अक्टूबर 2015
मैं बेहोश हूँ !
मैं उसकी आँखों को दोष दे दूँ !
या उसकी बनावट को दोष दूँ !
ये उम्र ही उस मोड़ पे है यारों !
होश में होते हुए भी मैं बेहोश हूँ।
#APM
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