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यह कोई जरूरी नहीं की सभी पंक्तियाँ हमारी ही घटनाओं से सम्बंधित हैं।
किसी और के विगत जीवन को भी देखते हुए लिखा जा सकता है।
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रविवार, 21 जुलाई 2013
बेवफाओं को वफ़ा तो कुछ ख़ास नहीं, वफाओं को प्यार के सिवा कुछ रास नहीं... बनाना हो तो शान्ति का वातावरण बनाओ, बेईमानी,झूठ,घृणा और उत्पात नहीं... ~~~~~~~~~ अंगिरा प्रसाद मौर्या
बेवफाओं को वफ़ा तो कुछ ख़ास नहीं,
वफाओं को प्यार के सिवा कुछ रास नहीं...
बनाना हो तो शान्ति का वातावरण बनाओ,
बेईमानी,झूठ,घृणा और उत्पात नहीं...
~~~~~~~~~ अंगिरा प्रसाद मौर्या
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