-:मेरे शायरियों की दुनियाँ में आपका स्वागत है:-
यह कोई जरूरी नहीं की सभी पंक्तियाँ हमारी ही घटनाओं से सम्बंधित हैं।
किसी और के विगत जीवन को भी देखते हुए लिखा जा सकता है।
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मंगलवार, 2 दिसंबर 2014
रोने की जरूरत ही क्या
न रोना कभी आके मेरे कब्र पर ऐ हमदम!
क्योंकि जो जलता नहीं वो बुझता नहीं।
चाहत थी चाहत है और चाहत रहेगी हरदम!
पर जो मिलता नहीं वो बिछड़ता भी नहीं।
~~~~~~~~~APM
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